नवरात्रि के पावन अवसर पर सामुदायिक विकास मैदान, गोविंदपुर में झारखंड मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर (JMATC) एवं सेल्फ डिफेन्स एसोसिएशन ऑफ झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में बेटियों द्वारा आत्मरक्षा का शानदार प्रदर्शन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में कुल 13 लड़कियों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा, साहस, अनुशासन और आत्मविश्वास का शानदार परिचय दिया। इनमें पाँच वर्ष एवं उससे अधिक आयु की बच्चियाँ शामिल थीं, जिन्होंने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।नवरात्रि के पावन माहौल में आयोजित इस प्रदर्शन का मुख्य संदेश था— “बेटियाँ भी दुर्गा हैं!” माँ दुर्गा की शक्ति, साहस और नारी सशक्तीकरण की भावना को समर्पित इस कार्यक्रम में बच्चियों ने आत्मरक्षा की तकनीकों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इतनी कम उम्र से ही बच्चियों का आत्मरक्षा के प्रति समर्पण और आत्मविश्वास समाज के लिए प्रेरणादायक रहा।
तेरहों बच्चियों ने नवरात्रि के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए यह संदेश दिया कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उचित प्रशिक्षण, अनुशासन और प्रोत्साहन मिलने पर वे अपनी सुरक्षा स्वयं करने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं। उनके प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया कि आत्मरक्षा केवल शारीरिक कौशल नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती, साहस और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है।JMATC के हेड कोच मास्टर सुनील कुमार प्रसाद के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में इन 13 लड़कियों ने आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बच्चियों द्वारा पटरा तोड़ने का प्रदर्शन और तलवारबाजी की कला रही। उनके दमदार प्रदर्शन और अद्भुत साहस को देखकर गोविंदपुर की जनता दंग रह गई। नवरात्रि के दौरान बेटियों की इस शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना दिया।10 वर्षों से अधिक समय से बेटियों को सशक्त बनाने में जुटे हैं मास्टर सुनील कुमार प्रसाद
JMATC के हेड कोच मास्टर सुनील कुमार प्रसाद पिछले 10 वर्षों से भी अधिक समय से लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल मार्शल आर्ट्स सिखाना ही नहीं, बल्कि बेटियों के भीतर साहस, आत्मविश्वास, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है।
इसके अतिरिक्त, वे सरकारी विद्यालयों में संचालित रानी लक्ष्मीबाई कार्यक्रम के अंतर्गत भी कई वर्षों से लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें जागरूक और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके निरंतर प्रयासों से अनेक लड़कियों को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।आज झारखंड मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर (JMATC) लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने और उन्हें मजबूत बनाने के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है। संस्था निरंतर इस दिशा में प्रयासरत है कि अधिक से अधिक बेटियाँ आत्मरक्षा सीखें और अपने जीवन में निडरता, आत्मसम्मान एवं आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ें।कार्यक्रम के माध्यम से अभिभावकों से भी अपील की गई कि वे अपनी बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रोत्साहित करें। बेटियों को सशक्त बनाना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।इस पहल का उद्देश्य लड़कियों एवं महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज में महिला सुरक्षा के महत्व को मजबूत करना है। संस्था का मानना है कि प्रत्येक बेटी को अपनी सुरक्षा करने का ज्ञान और आत्मविश्वास मिलना चाहिए, ताकि वह किसी भी चुनौती का सामना निडर होकर कर सके।
झारखंड मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर एवं सेल्फ डिफेन्स एसोसिएशन ऑफ झारखंड का नेतृत्व मास्टर सुनील कुमार प्रसाद कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में संस्था मार्शल आर्ट्स एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।इस अवसर पर अभिभावकों से अपील की गई कि वे अपनी बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रोत्साहित करें। आज के समय में आत्मरक्षा का ज्ञान बेटियों को न केवल सुरक्षित रहने में सहायता करता है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी विकसित करता है।
सामुदायिक विकास मैदान में 13 बच्चियों की इस शानदार प्रस्तुति ने नवरात्रि के उत्सव को एक विशेष संदेश से जोड़ दिया— नारी केवल शक्ति की उपासना का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वयं शक्ति का स्वरूप भी है।
“आज ही अपनी बेटी को आत्मरक्षा सिखाएँ, क्योंकि सुरक्षा हर बेटी का अधिकार है।”कार्यक्रम के अंत में सामुदायिक विकास मैदान स्थित पूजा पंडाल में शानदार प्रदर्शन करने वाली सभी 13 बच्चियों एवं उनके हेड कोच मास्टर सुनील कुमार प्रसाद को सम्मानित किया गया। बच्चियों के साहस, प्रतिभा और आत्मरक्षा के प्रति समर्पण की सराहना की गई। साथ ही, मास्टर सुनील कुमार प्रसाद के निरंतर प्रयासों और बेटियों को आत्मरक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान की भी प्रशंसा की गई। यह सम्मान बच्चियों के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण रहा तथा नारी सशक्तीकरण के संदेश को और अधिक मजबूती प्रदान करने वाला साबित हुआ।





