कौशिकी नृत्य सिर से पैर तक अंग- प्रत्यंग और ग्रंथियों का व्यायाम है

कौशिकी नृत्य सिर से पैर तक अंग- प्रत्यंग और ग्रंथियों का व्यायाम है

 

कौशिकी नृत्य शारीरिक और मानसिक रोगों की औषधि है,विशेषकर महिला जनित रोगों के लिए रामबाण है

जमशेदपुर:
आनंद मार्ग जागृति गदरा कैंपस में आनंद मार्ग प्रचारक संघ का महिला स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन प्रशिक्षक ने बारी-बारी से भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी के प्रतिकृति पर माला दिया ,फिर कार्यक्रम की शुरुआत हुई मुख्य प्रशिक्षक अवधूतिका आनंदसाधिका आचार्या ने लोगों को कौशिकी करवाया एवं उसके महत्व के विषय में बताते हुए कि
सही शिक्षक वही हो सकता है जो शारीरिक ,मानसिक तथा आध्यात्मिक रूप से विकसित हो तभी बच्चों को वह शिक्षक सही दिशा निर्देश दे सकते हैं ,आज इन्हीं गुणों का अभाव है जिसके चलते स्कूलों में तरह तरह की घटनाएं हो रही है उन्होंने कहा कि श्री श्री आनंदमूर्तिजी के द्वारा बताया गया कुछ विशेष प्रकार के नृत्य एवं आसन जिससे मनुष्य का तीनों स्तर पर विकास हो सकता है कौशिकी नृत्य लोगों को करवाया गया एवं विषय में उन्होंने कहा कि भगवान श्री श्री आनंदमूर्तिजी कौशिकी नृत्य के जन्मदाता हैं। यह नृत्य शारीरिक और मानसिक रोगों की औषधि है। विशेषकर महिला जनित रोगों के लिए रामबाण है ।

इस नृत्य के अभ्यास से 22 रोग दूर होते हैं। सिर से पैर तक अंग- प्रत्यंग और ग्रंथियों का व्यायाम होता है। मनुष्य दीर्घायु होता है ।यहनृत्य महिलाओं के सु प्रसव में सहायक है। मेरुदंड के लचीलेपन की रक्षाकरता है ।मेरुदंड, कंधे ,कमर, हाथ और अन्य संधि स्थलों का वात रोगदूर होता है। मन की दृढ़ता और प्रखरता में वृद्धि होती है । महिलाओं केअनियमित ऋतुस्राव जनित त्रुटियां दूर करता है । ब्लाडर और मूत्र नलीमें के रोगों को दूर करता है। देह के अंग-प्रत्यंगों पर अधिकतर नियंत्रण आता है ।मुख् मंडल और त्वचा की दीप्ति और सौंदर्य वृद्धि मेंसहायकहै। कौशिकी नृत्य त्वचा पर परी झुर्रियों को ठीक करता है ।आलस्य दूर भगाता है । नींद की कमी के रोग को ठीक करता है ।हिस्टीरिया रोग को ठीक करता है । भय की भावना को दूर कर के मनमें साहस जगाता है। निराशा को दूर करता है। अपनी अभिव्यंजना क्षमता और दक्षता वृद्धि में सहायक है । रीड में दर्द, अर्श, हर्निया, हाइड्रोसील ,स्नायु यंत्रणा ,और स्नायु दुर्बलता को दूर करता है। किडनी, गालब्लैडर, गैस्ट्राइटिस, डिस्पेप्सिया, एसिडिटी ,डिसेंट्री ,सिफलिस, स्थूलता ,कृशता और लीवर की त्रुटियों को दूर करने में सहायता प्रदानकरता है। 75 से 80 वर्ष की उम्र तक शरीर की कार्य दक्षता को बनाएरखता है ।

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई