श्री लेदर्स में श्रद्धा और स्मरण का संगम: किरणमयी डे की 103वीं जयंती मनाई गई, वीरांगना प्रीतिलता वाडेदार को दी गई श्रद्धांजलि
जमशेदपुर: शहर की पहचान और वर्षों से लोगों की सेवा में समर्पित प्रतिष्ठान श्री लेदर्स के संस्थापक स्वर्गीय सुरेश चंद्र डे की पत्नी किरणमयी डे की 103वीं जयंती बिष्टुपुर स्थित श्री लेदर्स शोरूम में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा शोरूम के कर्मचारियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। कार्यक्रम का माहौल भावुक और श्रद्धामय रहा, जहां सभी ने किरणमयी डे के जीवन, उनके संघर्ष, त्याग और परिवार के प्रति समर्पण को स्मरण किया।
इस अवसर पर स्वाधीनता संग्राम की महान वीरांगना और देश की पहली महिला शहीद मानी जाने वाली प्रीतिलता वाडेदार को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी वीरता और बलिदान को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने उन्हें राष्ट्र की प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम में श्री लेदर्स के को-पार्टनर एवं किरणमयी डे के पुत्र शेखर डे ने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि वे हर वर्ष अपनी मां का जन्मदिन श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि मां सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थीं, बल्कि पूरे परिवार की ऊर्जा और प्रेरणा का केंद्र थीं। उन्होंने अपने बच्चों और पोते-पोतियों को संस्कार, मेहनत और समर्पण का जो संदेश दिया, वही आज परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है।
शेखर डे ने कहा, “हम हर साल मां का जन्मदिन मनाते हैं, लेकिन सच यह है कि हम उन्हें हर दिन याद करते हैं। मां के अंदर जो अद्भुत ऊर्जा और अपने परिवार के प्रति समर्पण था, वही आज हम सभी के जीवन में प्रेरणा बनकर मौजूद है। उनके विचार और संस्कार हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि आज के दिन महान क्रांतिकारी प्रीतिलता वाडेदार को भी याद करना जरूरी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने बताया कि प्रीतिलता वाडेदार ने चट्टोग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने महिला साथियों के साथ ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी। लड़ाई के दौरान उन्होंने कई अंग्रेज सैनिकों का मुकाबला किया और अंत में गिरफ्तारी से बचने के लिए साइनाइड खाकर वीरगति प्राप्त की। उनका बलिदान देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को जानने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर देते हैं। श्री लेदर्स परिवार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ पारिवारिक श्रद्धांजलि का प्रतीक बना, बल्कि राष्ट्रभक्ति और त्याग की भावना को भी जीवंत कर गया।






