जमशेदपुर में कबूतरबाजी प्रतियोगिता का रोमांच, 30 से अधिक कबूतरबाजों ने दिखाया हुनर
जमशेदपुर: शहर में गुरुवार को एक अनोखी और पारंपरिक कबूतरबाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जहां कबूतरबाजों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुबह से ही आसमान में उड़ते कबूतरों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और प्रतियोगिता ने शहरवासियों के बीच खास आकर्षण पैदा किया।
कबूतर बाज क्लब की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में 30 से अधिक कबूतरबाज अपने-अपने प्रशिक्षित कबूतरों के साथ मैदान में पहुंचे। सुबह 7 बजे प्रतियोगिता की शुरुआत हुई, जिसमें कबूतरों को खुले आसमान में उड़ाया गया। प्रतियोगिता का मुख्य आधार कबूतरों की लगातार उड़ान का समय रखा गया है।
प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार, जो कबूतर शाम 7 बजे तक लगातार उड़ान भरते हुए आसमान में बना रहेगा, उसे विजेता घोषित किया जाएगा और ₹50 हजार नगद पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं शाम 6 बजे लौटने वाला कबूतर दूसरे स्थान पर और शाम 5 बजे लौटने वाला कबूतर तीसरे स्थान पर रहेगा।
प्रतिभागियों ने बताया कि इस प्रतियोगिता में शामिल कबूतर विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं, जो कई घंटों तक उड़ान भरने के बाद भी अपने मालिक के पास वापस लौट आते हैं। कबूतरबाजों का कहना है कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है। पुराने समय में राजा-महाराजा संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कबूतरों का इस्तेमाल करते थे और उसी परंपरा की झलक आज भी इस खेल में देखने को मिलती है।
कबूतरों की देखभाल और प्रशिक्षण को लेकर प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें विशेष खानपान दिया जाता है। धान के साथ बादाम और अन्य पौष्टिक आहार खिलाए जाते हैं, ताकि उनकी ताकत और सहनशक्ति बनी रहे।
परंपरा, जुनून और रोमांच का यह अनोखा संगम जमशेदपुर में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रतियोगिता के परिणाम का इंतजार अब देर शाम तक रहेगा, जब विजेता कबूतर और उसके मालिक का नाम सामने आएगा।







