*4300 करोड़ के घाटे के बाद भी उम्मीद जिंदा — एचईसी को नहीं किया जाएगा बं!*
*रांची* झारखंड की औद्योगिक धड़कन हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) के बंद होने की आशंका पर अब पूर्णविराम लग गया है।
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है — एचईसी को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे पुनर्जीवन की राह पर लाया जाएगा।
1958 में स्थापित एचईसी ने देश के स्टील, खनन, रक्षा और परमाणु क्षेत्र के लिए भारी मशीनें तैयार की हैं।
सात साल से घाटे में चल रही इस इकाई पर 4300 करोड़ रुपये की देनदारी जरूर है,
लेकिन दिल्ली से आई राहत भरी खबर ने हजारों परिवारों को उम्मीद की नई किरण दी है।
भारी उद्योग मंत्रालय ने संसदीय समिति को भरोसा दिलाया है कि भेल से 800 करोड़ रुपये के कार्यादेश जल्द जारी किए जाएंगे।
साथ ही, 100 करोड़ रुपये के उपकरण डिस्पैच से तत्काल राहत मिलेगी।
यह कदम एचईसी के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है।
हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन और बीएमएस ने इस फैसले को बड़ी जीत बताया है।
कई महीनों से वेतन का इंतज़ार कर रहे 1153 स्थायी और 1623 ठेका कर्मचारियों के बीच अब खुशी की लहर है।
सीएमडी के.एस. मूर्ति ने कहा — “मशीनें नहीं रुकेंगी, एचईसी फिर खड़ी होगी।”
यह फैसला झारखंड की औद्योगिक विरासत को बचाने के साथ-साथ हजारों परिवारों को भी राहत देगा।
अगर पुनरुद्धार योजना सफल रही — तो पूर्वी भारत के भारी उद्योग क्षेत्र में एक बार फिर गूंजेगी मशीनों की आवाज़।







