राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भाजपा जमशेदपुर महानगर मनाएगी राष्ट्रीय उत्सव, स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की भूमिका और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से होंगे कई आयोजन

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भाजपा जमशेदपुर महानगर मनाएगी राष्ट्रीय उत्सव, स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की भूमिका और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से होंगे कई आयोजन

जमशेदपुर। भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाएगी। शुक्रवार को साकची स्थित जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने आयोजन की विस्तृत रूपरेखा साझा की। सुधांशु ओझा ने बताया कि इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका, राष्ट्रवादी चेतना में इसके योगदान और युवा पीढ़ी में राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रेस वार्ता में जमशेदपुर महानगर के जिला महामंत्री अनिल मोदी, जिला उपाध्यक्ष सह कार्यक्रम के जिला संयोजक बबुआ सिंह, जिला मीडिया प्रभारी प्रेम झा समेत उज्ज्वल सिंह एवं किशोर ओझा मौजूद रहे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने बताया कि 15 नवंबर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर साकची स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया जाएगा। इसके पश्चात प्रतिमा स्थल पर 150 से अधिक नागरिकों एवं वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सम्पूर्ण गायन किया जाएगा। सुधांशु ओझा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया था, जिसका प्रथम वाचन 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कोलकाता में किया था। वर्ष 1950 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि यह गीत देश की आज़ादी के संघर्ष में राष्ट्रवाद, एकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बना। इसकी प्रबल राष्ट्रीय भावना से घबराकर अंग्रेजी हुकूमत ने ‘वंदे मातरम्’ के उच्चारण पर ही प्रतिबंध लगा दिया था। यही गीत स्वदेशी आंदोलन का प्रमुख नारा बना और बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, भगत सिंह तथा सुभाषचंद्र बोस जैसे कई क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत रहा।

जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1923 के काकीनाडा में हुए कांग्रेस अधिवेशन में पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर को वंदे मातरम गाने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन लेकिन उस वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने धार्मिक आधार पर आपत्ति जताई और कहा कि इस्लाम में संगीत वर्जित है। तब से लेकर आज तक कांग्रेस, उनके नेताओं और उसके सहयोगी दलों ने कई बार विभिन्न मंचों पर वंदे मातरम् के प्रति असहिष्णुता दिखाई। 1937 में मुस्लिम लीग के नेताओं को खुश करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय गीत को आधिकारिक रूप से बदलने का निर्णय लिया। वहीं 2019 में मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सचिवालय में वंदे मातरम् गाने पर प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने कहा कि आज भी एआईएमआईएम जैसे दल वंदे मातरम् के विरोध में खड़े हैं, तेलंगाना सरकार ने कहा है कि स्कूलों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं किया जाएगा। जबकि भाजपा इस गीत को भारतीय अस्मिता, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक मानती है।

आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में जिला कार्यालय में ‘वंदे मातरम् @150’ विषय पर प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही ‘आनंदमठ’ और ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक व साहित्यिक पक्ष पर संगोष्ठियाँ आयोजित की जाएँगी। विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध, चित्रकला और कविता प्रतियोगिताएँ भी होंगी, ताकि नई पीढ़ी इस गीत की भावना को समझ सके और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को आत्मसात कर सके। इसके लिए भाजपा जमशेदपुर महानगर की ओर से व्यापक तैयारी की जा रही है।

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